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साँई एकेडमी परिचय

अत दीपों भव की अवधारणा को अपना केंद्रीय विचार बनाने वाले साँई एकेडमी परिवार "अपना प्रकाश स्वयं बनो" की सार्थकता में विश्वास करता है। शिक्षित बनो, संघर्ष करो, संगठित रहो के साथ ही महान भारत राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में आज का युवा भारतीय जो उच्च शिक्षित है, विकासशील भारत को विकसित भारत बनाना चाहता है। राष्ट्र की विकास प्रक्रिया में शामिल होकर नीति निर्माण से लेकर उसके प्रभावी क्रियान्वन को सुनिश्चित करने में विश्वास रखता है, जिससे की 1 अरब 21 करोड़ से अधिक जनसँख्या वाले महान भारत के अंतिम पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति का अंतोदय , सर्वोदय किया जा सके।

साँई एकेडमी परिवार ऐसे ही योग्य, सेवाभावी, राष्ट्र के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव रखने वाले युवाओ को परिष्कृत कर उन्हें सिविल सेवक बना कर भारत राष्ट्र को अँधेरे से उजाले की ओर, अज्ञानता से ज्ञान की ओर, दर्द से राहत की ओर, बंधनों से आत्मनिर्भरता की ओर, अशिक्षा से शिक्षा की ओर, समस्याओं से समाधान की ओर ले जाने के लिये दृढ संकल्पित है।
साँई एकेडमी परिवार मे आप सभी विद्यार्थीगण एवं हम सभी शिक्षकगण गुरु शिष्य की उस महान श्रेष्ठ भारतीय परम्परा का निर्वहन कर रहे है जिसका समृद्ध इतिहास भारतीय सामाजिक संस्कृति सन्दर्भ में युगों पुराना है। सतयुग में देवताओ को भी ऋषि मुनियों के पास, त्रेता युग में भगवान राम को, द्वापर युग में भगवान कृष्ण को सांदीपनी ऋषि के पास, अर्जुन को द्रोणाचार्य के पास, चन्द्रगुप्त मौर्य को आचार्य चाणक्य के पास शिक्षा प्राप्ति हेतु जाना पड़ा था। बिहार स्थित नालन्दा, तक्षशिला विश्वविद्यालय प्राचीन काल से ही हमारी परम पवित्र गुरु शिष्य परम्परा के निर्वहन के परिचायक रहे है। जीवन के भौतिक क्षेत्र , आध्यात्मिक क्षेत्र सभी मे गुरु शिष्य परम्परा की केंद्रीय भूमिका एवं महत्त्व है ।

" न  कोई शक , न  कोई डर,
जीतेंगे  हर  बाजी हम।
                   पहुचेंगे सफलता  के सर्वोच्च  शिखर पर, 
                   साँई एकेडमी में  पढ़  कर  हम।

साँई एकेडमी गठन पूर्व चिंतन

साँई एकेडमी गठन के पूर्व मैंने अपने स्व अनुभवों एवं इंदौर स्थित विभिन्न क्लासेस में जाकर शोध तथ्य संकलन करके यह चिंतन मनन किया की -

  1. हज़ारों लाखो रूपए देने के बाद भी बच्चों / विद्यार्थियों को सही शिक्षा, वास्तविक ज्ञान नहीं मिल पा रहा है
  2. पढने वाले शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता, ज्ञानस्तर अत्यधिक ऊँचा नहीं है
  3. शिक्षक विद्यार्थियों से मित्रवत सरल, सहज, सम्बन्ध नहीं रखते है
  4. क्लास के बाद विषय विशेष पर बात न करना, उत्तरो को चेक नहीं करना
  5. केवल फीस जमा करने हैतु बार बार प्रेशर डालना
  6. आर्थिक एवं मानसिक रूप से पीड़ित करना

उपरोक्त समस्याओ के संपूर्ण समाधान हेतु तथा सबका साथ - सबका विकास की अवधारणा को साकार स्वरुप प्रदान करने के चिंतन मनन से ही जन्म हुआ है साँई एकेडमी का ।
इस घोर व्यावसायिकता के वर्तमान दौर से दुखी व पीड़ित होकर विचार किया गया की अँधेरे में बैठने से ज्यादा अच्छा हैं की एक दीप जलाकर इस अँधेरे को चीरने का प्रयास किया जाये ।

साँई एकेडमी स्थापना का उद्देश्य -

जीतने वाले कोई काम अलग नहीं करते बस उनके काम करने का ढंग अलग होता है। इस अलग ढंग से आप सभी नवयुवाओं को परिचित कराने एवं सपने भी सच होते है की परिकल्पना को साकार स्वरुप प्रदान करने के परम पवित्र उद्देश्य के साथ ही साँई एकेडमी की स्थापना की गई है ।
प्रमुख उद्देश्य -

  1. राष्ट्र के नवयुवाओ को सही मार्गदर्शन प्रदान कर उन्हें उनके इच्छित लक्ष्य प्राप्ति हेतु सही शिक्षा प्रदान करना ।
  2. उच्च शिक्षित विषय विशेषज्ञों के द्वारा अध्यापन कार्य करवाकर श्रेष्ठ शैक्षणिक वातावरण का निर्माण करना ।
  3. शिक्षा की व्यावसायिकता के बढ़ते इस दौर में विद्यार्थियों का शोषण होने से बचाना
  4. युवाओं को कक्षाओं में मित्रवत, अनौपचारिक, पारिवारिक, परमर्शदायी वातावरण मुहैया करना

विद्यार्थियों को सही, कुशल मार्गदर्शन प्रदान कर एक श्रेष्ठ सिविल सेवक बनाकर भारत माता की सेवा में समर्पित करना ही साँई एकेडमी का परम पुनीत उद्देश्य है ।

संस्थान के प्रमुख लक्ष्य -

  1. विद्यार्थियों को सही शैक्षणिक मार्गदर्शन प्रदान करना
  2. विद्यार्थियों से मित्रवत, सरल, सहज गुरु - शिष्य सम्बन्ध रखना
  3. कक्षाओ में प्रश्न पूछने, उत्तर चेक करवाने, अधिक परिश्रम करने हेतु प्रेरित करना
  4. अलग - अलग विषय के विशेषज्ञों से मार्गदर्शन, शिक्षण कार्य सम्पादित करवाना

सिविल सर्विस की कठिन तैयारी के डर से मत डरो, डर के आगे ही जीत है सफलता का सरलीकरण करवाकर नवयुवओ को परीक्षा उपयोगी मार्गदर्शन अध्यन सामग्री प्रदान कर उनके चयन को सुनिश्चित करना ही संस्थान का परम लक्षय है

अध्यापन विधि (Study Technique)-

  • निर्धारित सिलेबस अनुसार सम्पूर्ण तैयारी करवाना
  • निश्चित समय सीमा का निर्धारण
  • सुबह दोपहर शाम, सुविधानुसार कक्षाए
  • पृथक - पृथक विषयो के शिक्षण हैतु पृथक पृथक शिक्षको की व्यवस्था
  • प्रश्न प्रारूपों का नियमित अधयन - अद्यापन
  • उत्तरो को चेक करवाने की नियमित व्यवस्था
  • साप्ताहिक टेस्ट का आयोजन
  • प्रिंटेड नोट्स पूर्ण स्टडी मटेरियल तैयार प्रदान करना
  • विद्यार्थियों को उत्तर में चित्र निर्माण, फ्लो चार्ट बनाने की कला सीखना
  • विद्यार्थियों को अपने उत्तरो को वर्त्तमान से जोड़ने की प्रक्रिया को सीखना